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क्या कहना

by 03:33
वाह नेताजी, क्या कहना अद्भुत है हमारी नगरी अजीब हिया यहाँ के जन एक पैर कब्र में है फिर भी फिक्र है सत्ता की होड़ पड़ी है सत्ता की गलि...Read More

यादे

by 05:43
गुमशुम, चुप चाप बैठा न जाने क्या हो जाता क्षिन्गुर बोल उठते उपवन में आश जग जाता जब भी मैं सोचता कही सैर कर आऊ पर न जाने क्या हो जाता...Read More
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